करैरा– नगर के मध्य तहसील कार्यालय के सामने रिहायशी इलाके में लगा “नेशनल मेगा ट्रेड फेयर” इन दिनों स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बिना किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व के, साल में कभी भी आयोजित होने वाले इस मेले ने क्षेत्र की शांति भंग कर दी है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
तेज शोर से छात्रों और बीमारों की नींद हराम-
वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं का समय है और छात्र तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन मेले में देर रात तक बजने वाले अनियंत्रित लाउडस्पीकर और विशालकाय झूलों के शोर ने छात्रों की एकाग्रता भंग कर दी है। वहीं, शोर के कारण क्षेत्र के बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को आराम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य में गिरावट की आशंका बनी हुई है।
यातायात और स्वच्छता अभियान को लग रहा पलीता-
मेले के पास कोई व्यवस्थित पार्किंग न होने के कारण आने वाले लोग मुख्य मार्ग पर ही गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं, मेले के दुकानदार और कर्मचारी सुबह के अंधेरे में रिहायशी इलाकों में गंदगी फैला रहे हैं, जिससे क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। यह स्थिति सरकार के स्वच्छता अभियान को भी खुली चुनौती दे रही है।
बिजली की बर्बादी और राजस्व की हानि-
मेले में नियमों को ताक पर रखकर भारी मात्रा में बिजली का दुरुपयोग किया जा रहा है। दर्जनों दुकानों, झूलों और साउंड सिस्टम के लिए हो रहा विद्युत का अपव्यय अंततः विद्युत मंडल को आर्थिक क्षति पहुँचा रहा है, जिसका बोझ भविष्य में आम जनता पर बढ़े हुए बिलों के रूप में आ सकता है। साथ ही, नगर परिषद को भी इस आयोजन से कोई विशेष राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है, जो सरकारी खजाने का नुकसान है।
स्वदेशी के नाम पर धोखा, घटिया चाइनीज माल की बिक्री-
एक ओर सरकार ‘स्वदेशी’ को बढ़ावा दे रही है, वहीं इस ट्रेड फेयर में धड़ल्ले से घटिया और चाइनीज सामान बेचा जा रहा है। आकर्षक पैकिंग और दिखावे के कारण आम जनता इस धोखे का शिकार हो रही है, जिससे स्थानीय व्यापार और स्वदेशी अभियान दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
क्षेत्रवासियों की मांग:-
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि परीक्षाओं को देखते हुए मेले के शोर पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और अव्यवस्थाओं पर लगाम कसते हुए इसकी वैधानिकता की जांच की जाए।
