करैरा | मुंशी प्रेमचंद कॉलोनी में 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर एक भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक संध्या की अध्यक्षता दतिया से पधारे प्रसिद्ध गीतकार एवं साहित्य अकादमी से सम्मानित साहित्यकार राज गोस्वामी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार सतीश श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ समस्त साहित्यकारों द्वारा माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रवादी कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में देशप्रेम का जज्बा जगाया गया।
काव्य पाठ के मुख्य अंश:
- प्रभु दयाल शर्मा: सर्वप्रथम उन्होंने माँ सरस्वती की वंदना की और अपनी राष्ट्रवादी कविताओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने आह्वान किया— “सब एक साथ संकल्प करो, हम हिन्दू राष्ट्र बनायेंगे।”
- प्रमोद गुप्ता ‘भारती’: उन्होंने कविता को जीवन का सार बताते हुए कहा— “माँ की गोदी में बाल रूप, यौवन के संग खेली है, वृद्धापन की तन्हाई में कविता सखी सहेली है।”
- प्रतीक चौहान: युवा कवि की पंक्तियों को खूब सराहना मिली— “हमारे ये कड़े लहजे ये तेवर खानदानी हैं, जमीं पर पांव हैं अपने मगर कद आसमानी हैं।”
- डॉ. राजेन्द्र गुप्ता: करैरा के प्रसिद्ध चिकित्सक ने प्रेम और सृजन पर पंक्तियां पढ़ीं— “बन सको कागद अगर मैं कलम बन जाऊंगा, पूर्णता दें प्रेम को वे पंक्तियाँ लिख पाऊंगा।”
- सतीश श्रीवास्तव: मुख्य अतिथि ने अपनी पंक्तियों से गांव की यादें ताज़ा की— “बहुत दिनों के बाद गया था जब मैं अपने गाँव, ढूंढ रहा था मिल जाए वह पीपल वाली छांव।”
कार्यक्रम में साहित्यकार रमेश चन्द्र बाजपेयी ने से प्रेरणादायक कविता सुनाई, वहीं डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने अपनी चिरपरिचित शैली में काव्य पाठ किया। गोष्ठी के अंत में अध्यक्ष राज गोस्वामी ने अपने संबोधन के साथ बुंदेली पुट वाली व्यंग्य कविता— “खूबई तौ खाये हैं हराम के पुआ, फिर रये अब काये फुलायें गलसुआ” सुनाकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रमोद गुप्ता ‘भारती’ ने किया और आभार प्रदर्शन रमेश चन्द्र वाजपेयी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र गुप्ता, प्रतीक चौहान सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और श्रोता उपस्थित रहे।
