भितरवार (ग्वालियर)-जिस फसल को किसान ने बेटे की तरह सींचा, जिस पर उसने दिन-रात पसीना बहाया, वही फसल कुछ ही पलों में ओलों की मार से जमीन पर ढेर हो गई। मंगलवार सुबह ग्वालियर जिले की भितरवार तहसील के ग्राम चीनोर, आंतरी, करहिया, कछौआ, भौंरी, ररुआ सहित कई गांवों में हुई भीषण ओलावृष्टि किसानों के लिए किसी कहर से कम नहीं रही।
जहां लहलहाते थे खेत, वहां अब सन्नाटा-
तेज हवा और आसमान से बरसते बड़े-बड़े ओलों ने गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया। खेतों में खड़ी फसलें ओलों की चोट सह न सकीं और देखते ही देखते जमीन पर बिछ गईं। गांवों की गलियों और खेतों के रास्तों पर ओलों की सफेद चादर फैल गई, यह सफेदी किसानों के लिए गहरे दुख का प्रतीक बन गई।
आंखों में आंसू, दिल में सवाल-
खेतों में खड़े किसान अपनी बर्बाद फसल को देखते रह गए। किसी की आंखों में आंसू थे, तो किसी के चेहरे पर खामोशी। किसानों का कहना है कि कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने पूरे साल की कमाई छीन ली। बीज, खाद, पानी और मेहनत पर लगाया गया हर रुपया मानो मिट्टी में मिल गया।
किसानों पर टूटा आर्थिक संकट-
ओलावृष्टि से कई किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। इससे उनके सामने परिवार के पालन-पोषण और कर्ज चुकाने की बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली, तो अगली फसल बोना भी मुश्किल हो जाएगा।
ओलावृष्टि की खबर मिलते ही भितरवार एसडीएम राजीव समाधिया राजस्व अमले के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर खेतों का निरीक्षण किया और नुकसान की जानकारी ली। प्रशासन द्वारा सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन किसानों की नजर अब राहत और मुआवजे पर टिकी हुई है।
किसान अब सरकार से
किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी पीड़ा समझेगी और शीघ्र मुआवजा देकर उन्हें संबल देगी। खेतों में बिखरी फसलें भले ही दोबारा न लौटें, लेकिन समय पर मदद मिल जाए तो शायद किसानों का हौसला फिर से खड़ा हो सके।
