शिवपुरी – जिले की करैरा तहसील में बुधवार की रात कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि अन्नदाता के चेहरों की मुस्कान मातम में बदल गई। अचानक हुई भारी ओलावृष्टि ने क्षेत्र के करीब 50 गांवों में तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। जिन खेतों को देखकर किसान अपनी बेटियों की शादी और कर्ज मुक्ति के सपने संजो रहा था, आज वही खेत ओलों के कारण बर्बाद नजर आ रहे हैं।
मिनटों में मिट्टी में मिली साल भर की मेहनत-
बुधवार रात आसमान से गिरे इन ‘सफेद पत्थरों’ ने सरसों, गेहूं और चने की फसलों को लहूलुहान कर दिया। टकटकी, कड़ोरा लोधी, चिरली, नंदपुर, मछावली, चिनोद, टीला और जुझाई जैसे गांवों में ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खड़ी फसलें टूटकर जमीन पर बिछ गईं। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूटने जैसा है।
प्रभावित गांवों से आ रही तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। अपनी बर्बाद फसल को हाथों में लेकर सिसकते किसानों की बेबसी साफ देखी जा सकती है। ग्राम चिनोद और टकटकी के किसानों ने रुंधे गले से बताया कि अब न बच्चों की स्कूल फीस भरने के पैसे बचे हैं और न ही साहूकार का कर्ज चुकाने का कोई रास्ता बचा है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सर्वे के निर्देश जारी-
भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया है। करैरा तहसीलदार कल्पना शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरआई (RI) और पटवारियों की विशेष टीमें गठित कर प्रभावित क्षेत्रों में रवाना कर दी हैं।तहसीलदार का कहना है कि
“हमने पटवारियों को युद्धस्तर पर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। शीघ्र ही सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर किसानों को राहत राशि और मुआवजा प्रदान करने की कार्यवाही की जाएगी।”
— कल्पना शर्मा, तहसीलदार, करैरा
मुआवजे पर टिकी आखिरी उम्मीद-
वर्तमान में सिल्लारपुर, वनगवां, कारोठा और बगरौदा जैसे दर्जनों गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। अब पीड़ित किसानों की आखिरी उम्मीद सरकार के सर्वे और उचित मुआवजे पर टिकी है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वे पारदर्शी तरीके से हो ताकि हर पीड़ित को उसकी मेहनत का हक मिल सके।
