शिवपुरी |
मध्यप्रदेश में पशुपालन को आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में शिवपुरी जिले के ग्राम नौहरीखुर्द निवासी युवा पशुपालक वीरू ओझा एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक तकनीकों और राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर वीरू ओझा आज पशुपालन के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 1 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
राज्य की योजनाओं से बदली ग्रामीण युवा की तकदीर-
कृषि संकाय से स्नातक वीरू ओझा ने कोरोना काल में पशुपालन को आजीविका के रूप में अपनाया। शुरुआती दौर में उनके पास केवल दो पशु थे, लेकिन पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से उन्होंने अपने पशुधन में विस्तार किया। आज उनके पास कुल 16 पशु हैं, जिनमें गाय एवं भैंस शामिल हैं।
सेक्स सॉर्टेड सीमेन योजना बनी गेम-चेंजर-
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अभिनव पहल सेक्स सॉर्टेड सीमेन योजना के अंतर्गत, कलेक्टर के निर्देशन में कराए गए कृत्रिम गर्भाधान से वीरू ओझा को शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त हुई। वर्तमान में उनके पास छह बछड़े हैं, जिनमें गिर और साहीवाल नस्ल के पशु शामिल हैं। यह योजना राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उच्च दुग्ध उत्पादन से बढ़ी आमदनी-
वीरू ओझा के पास एक गाय प्रतिदिन 16 से 17 लीटर दूध का उत्पादन कर रही है। पशुपालन व्यवसाय से उन्हें प्रतिदिन 3 से 4 हजार रुपये की आय हो रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन चुके हैं। उनका मॉडल यह दर्शाता है कि सही तकनीक और सरकारी सहयोग से पशुपालन एक लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।
ग्रामीण युवाओं के लिए रोल मॉडल-
वीरू ओझा की सफलता कहानी मध्यप्रदेश के उन हजारों ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं। उन्होंने अन्य पशुपालकों से अपील की कि वे पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी प्रशिक्षण लें और डेयरी प्लस योजना सहित राज्य शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं।
राज्य सरकार की योजनाओं और वैज्ञानिक पशुपालन के माध्यम से मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। वीरू ओझा जैसे पशुपालक इस बात का प्रमाण हैं कि पशुपालन अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक सशक्त व्यवसाय मॉडल बन चुका है।
