शिवपुरी, 23 फरवरी 2026।
जिले में पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कम्बाईन हार्वेस्टर मालिकों एवं संचालकों, बड़े और उन्नतशील कृषकों तथा कृषक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में कलेक्टर श्री चौधरी ने स्पष्ट कहा कि शिवपुरी जिले को हर हाल में “नरवाई विहीन जिला” बनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कम्बाईन हार्वेस्टर से गेहूँ की कटाई के बाद शेष फसल अवशेष का स्ट्रारीपर मशीन के माध्यम से भूसा बनाकर समुचित निपटान किया जाए, ताकि किसानों को पराली जलाने की आवश्यकता न पड़े।
कलेक्टर ने बताया कि नरवाई जलाने की घटनाएं सैटेलाइट के माध्यम से मॉनिटर की जाती हैं। रबी वर्ष 2025 में जिले में लगभग 750 नरवाई जलाने की घटनाएं दर्ज की गई थीं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इन घटनाओं को शून्य पर लाना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि कोई किसान नरवाई जलाते हुए पाया गया तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन ग्रामों में पूर्व में नरवाई जलाने की घटनाएं अधिक हुई हैं, वहां विशेष शिविर, बैठकें और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। कर्मचारी और अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के पर्यावरणीय और कानूनी पहलुओं के बारे में समझाएं।
बैठक में अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला, उद्योग विभाग के प्रबंधक अरविंद महेश्वरी, उप संचालक कृषि पान सिंह करौरिया, सहायक संचालक कृषि, सहायक कृषि यंत्री, सभी विकासखंडों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कृषक संगठन की ओर से श्री धाकड़ सहित लगभग 75 कम्बाईन हार्वेस्टर मालिक, संचालक और किसान भी बैठक में शामिल हुए।
प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और तकनीकी विकल्पों के माध्यम से ही शिवपुरी को नरवाई मुक्त बनाया जा सकता है।
