भोपाल |राजनीति के बिसात पर जब मोहरे बदले जाते हैं, तो शोर बहुत होता है, लेकिन जब हितानंद शर्मा जैसे मौन साधक की भूमिका बदलती है, तो सन्नाटा भी बहुत कुछ कह जाता है। मध्य प्रदेश बीजेपी के ताकतवर संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा अब बीजेपी के दफ्तर से विदा लेकर वापस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में लौट रहे हैं।
संघ की नई ‘बौद्धिक’ बिसात
हितानंद शर्मा को रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख नियुक्त किया गया है। इसका मतलब है कि अब वह पर्दे के पीछे रहकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संघ की वैचारिक नींव को मजबूत करेंगे।
‘चुनावी चाणक्य’ का शानदार सफर
अशोकनगर जिले की गलियों से निकलकर सत्ता के शीर्ष गलियारों तक पहुँचने वाले हितानंद शर्मा ने सुहास भगत की विरासत संभाली थी। उनके कार्यकाल में बीजेपी ने बूथ लेवल पर ‘पन्ना प्रमुखों’ की ऐसी फौज खड़ी की, जिसने 2023 के चुनावों में विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए। उनकी फोटोग्राफिक मेमोरी ऐसी है कि वह छोटे से छोटे कार्यकर्ता को नाम से पुकारते हैं—यही उनकी असली ताकत रही है।
अब ‘कुर्सी’ पर किसका कब्जा?
हितानंद जी के जाते ही भोपाल के बीजेपी दफ्तर में सबसे बड़ा सवाल गूँज रहा है—“अब कौन?” संगठन महामंत्री का पद कोई मामूली पद नहीं है; यह संघ और सरकार के बीच का वो पुल है जिस पर पूरी पार्टी टिकी होती है।
क्यों है यह बदलाव खास?
- अनुशासन का पर्याय: हितानंद शर्मा ने मंत्रियों तक को अनुशासन का पाठ पढ़ाया है।
- संघ का कंट्रोल: उनकी वापसी बताती है कि संघ अब अपनी कोर टीम को बौद्धिक मोर्चे पर और अधिक सक्रिय करना चाहता है।
