सतना, 14 मार्च। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के निर्णय के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। सतना में शुक्रवार को सैकड़ों शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त कलेक्टर (एडीएम) को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति देने की चेतावनी दी है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों की सेवा देने के बाद अब उनसे पात्रता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता थोपना अनुचित है और इससे उनके आत्मसम्मान पर भी आघात पहुंच रहा है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उन्होंने उसी के आधार पर सेवा शुरू की थी।
दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी एक पत्र के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय का हवाला देते हुए कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य बताया गया है। आदेश के अनुसार यदि कोई शिक्षक TET पास नहीं करता है तो उसे अयोग्य मानते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है।
ज्ञापन में शिक्षकों ने कहा कि प्रदेश में हजारों शिक्षक ऐसे हैं जो पिछले दो से ढाई दशक से निष्कलंक सेवा दे रहे हैं। सेवा के अंतिम वर्षों में परीक्षा अनिवार्य किए जाने से उनमें मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उनका कहना है कि इतने वर्षों की सेवा के बाद नौकरी समाप्त होने का खतरा उनके सम्मान और जीवन-यापन दोनों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।
शिक्षकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह सर्वोच्च न्यायालय में उनका पक्ष मजबूती से रखे और इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए पहल करे। साथ ही राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को TET से छूट प्रदान की जाए।
ज्ञापन में शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति लेने जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर
