वर्चुअल ऑटोप्सी जिसे “नॉन-इवेजिव पोस्टमॉर्टम” भी कहा जाता है शव की सर्जिकल कट के बिना जांच करने का एक तरीका है। जापान और अन्य विकसित देशों में इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसका मुख्य लाभ यह है कि इसमें शव को बिना किसी शारीरिक नुकसान के पूरी तरह से स्कैन किया जाता है। वर्चुअल ऑटोप्सी से प्राप्त रिपोर्ट डिजिटल साक्ष्य के रूप में बेहद मजबूत होती है और इनका उपयोग कानूनी मामलों में भी प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति की मौत नस में ब्लॉकेज के कारण हुई है तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी तस्वीर मौजूद होगी जिसमें तीन स्तरों पर ब्लॉकेज की स्थिति दिखाई जाएगी।
एम्स भोपाल के लिए यह परियोजना इसलिए भी खास है क्योंकि पारंपरिक पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में शव की चीरफाड़ होती है जो कई बार परिजनों के लिए मानसिक आघात का कारण बन सकती है। विशेष रूप से कुछ धार्मिक और सामाजिक कारणों से परिवार इस प्रक्रिया के खिलाफ होते हैं और ऐसे मामलों में विवाद भी उत्पन्न हो सकता है। वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से परिजनों को शव सही अवस्था में सौंपा जा सकेगा और उन्हें किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया पारंपरिक पोस्टमॉर्टम से काफी तेज होती है। जहां पारंपरिक प्रक्रिया में कई घंटे लग जाते हैं वहीं वर्चुअल ऑटोप्सी केवल आधे घंटे में पूरी हो सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ट्रॉमा केस सड़क हादसों और संक्रामक बीमारियों से जुड़ी मौतों के मामलों में अत्यधिक प्रभावी मानी जा रही है। कोविड जैसी महामारियों के दौरान यह तकनीक स्वास्थ्यकर्मियों के लिए संक्रमण के खतरे को भी कम करती है।
वर्तमान में भारत में वर्चुअल ऑटोप्सी का उपयोग कुछ चुनिंदा स्थानों पर किया जा रहा है जैसे कि एम्स दिल्ली और शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस। अब भारत सरकार ने 2026 तक देशभर में 38 वर्चुअल ऑटोप्सी केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस तकनीक को लागू करने से पूरे देश में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
सांसद आलोक शर्मा ने इस परियोजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और आशा जताई है कि जल्दी ही इसके लिए फंड जारी किया जाएगा। एम्स भोपाल के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है जो न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में चिकित्सा विज्ञान में एक नई दिशा की शुरुआत कर सकता है।
