ग्वालियर। डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार एडवोकेट अनिल मिश्रा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने उन्हें एक लाख रुपए के निजी मुचलके और एक लाख रुपए की जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने इस दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि अनिल मिश्रा को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज करने और हिरासत में लेने की प्रक्रिया में कई procedural गलतियां हुई हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में जुलूस निकालने और अन्य संबंधित गतिविधियों पर रोक भी लगाई है।
अनिल मिश्रा को 1 जनवरी की रात गिरफ्तार किया गया था।
इस विवाद के चलते 2 जनवरी को ग्वालियर में भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और अन्य दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया।
हाईकोर्ट का आदेश इस मामले में न्यायपालिका की सख्त निगरानी और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की अहमियत को उजागर करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि कानून का सही पालन और नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है, खासकर विवादास्पद मामलों में।
