छह सप्ताह की अवधि वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक अभियंताओं को ताप विद्युत एवं जल विद्युत संयंत्रों के संचालनऑपरेशन और संधारणमेंटेनेंस से संबंधित विस्तृत एवं गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को विद्युत उत्पादन की विभिन्न प्रणालियों उपकरणों की कार्यप्रणाली सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी चुनौतियों से अवगत कराया जाएगा ताकि वे भविष्य में पावर प्लांट संचालन की जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें।प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि के रूप में सहायक अभियंताओं को दो सप्ताह का विशेष सुपर-क्रिटिकल सिम्युलेटर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अभियंताओं को अत्याधुनिक सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित विद्युत संयंत्रों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से अभियंता वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान करना सीखेंगे जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।
वहीं नवनियुक्त केमिस्टों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जल रसायनवॉटर केमिस्ट्री कोयला परीक्षणकोल टेस्टिंग बॉयलर एवं कूलिंग सिस्टम से संबंधित रासायनिक प्रक्रियाओं तथा पर्यावरणीय कारकों के परीक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रदूषण नियंत्रण उत्सर्जन मानकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवीनतम नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी जिससे विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एनपीटीआई नागपुर के प्रमुख निदेशक श्री रामचन्द्र उकिरदे ने कहा कि इस प्रशिक्षण सत्र का पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया है कि सहायक अभियंता ताप एवं जल विद्युत गृहों के संचालन और संधारण कार्यों में समान रूप से दक्षता प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्युत उत्पादन की नवीन तकनीकों के साथ-साथ पर्यावरणीय बारीकियों गुणवत्ता मानकों एवं सुरक्षा उपायों की भी गहन जानकारी दी जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि एनपीटीआई का उद्देश्य ऐसे कुशल और जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी तैयार करना है जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाएगा बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।
