लहसुन से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
लहसुन में मौजूद एलिसिन तत्व में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह गले में सूजन और संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। रोज़ 1–2 कली लहसुन का सेवन सर्दी-जुकाम और गले की खराश से बचाव करता है।
अगर गले में दर्द या बैठापन महसूस हो रहा है तो अदरक, काली मिर्च और तुलसी डालकर बनाई गई गर्म चाय बेहद फायदेमंद होती है।
अदरक सूजन कम करता है
काली मिर्च बलगम निकालने में मदद करती है
तुलसी इम्युनिटी को मजबूत बनाती है
यह चाय शरीर को गर्म रखती है और गले को राहत देती है।
मुलेठी: आयुर्वेदिक रामबाण
आयुर्वेद में मुलेठी को गले की बीमारियों के लिए कारगर माना गया है। मुलेठी का छोटा टुकड़ा धीरे-धीरे चूसने से इसका रस गले की खराश को शांत करता है और खांसी में आराम देता है।
शहद से मिले प्राकृतिक आराम
शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
ओटमील और पोषक आहार का सेवन
ओटमील में जिंक, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्युन सिस्टम को मजबूत करते हैं। इसमें केला, शहद, दालचीनी और थोड़ा अदरक मिलाकर खाने से गले को आराम मिलता है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
अगर गले का दर्द 3–4 दिन से ज्यादा बना रहे, बुखार हो, निगलने में परेशानी हो या आवाज लगातार बैठी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
