मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिेंदे गुट की बड़ी जीत के बाद उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। हालांकि वह अब भी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि मेयर उनका ही बनेगा। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को रिजॉर्ट भेज दिया गया।
पिछले 25 साल से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का कब्जा था। हालांकि शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद समीकरण बदल गए. इस बार के चुनाव में उद्धव सेना को कुल 65 सीटें मिली हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। अगर दोनों की सीटें जोड़ दी जाएं तो उनकी 94 सीटें हो जाती हैं। वहीं बीजेपी की 89 ही सीटें हैं। ऐसे में अगर शिवसेना बंटी ना होती तो बीजेपी उससे पीछे रह जाती।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का मेयर अब भी बन सकता है। इसके बाद शिंदे ने अपने पार्षदों को रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। बीजेपी और शिंदे सेना की कुल सीटें 118 हैं। वहीं 227 सीटों वाली महानगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। इस बार अजित पवार ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कुल सीटें 71 हैं। इसके अलावा एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। कांग्रेस अगर उनके साथ आती है तो 24 सीटें और जुड़ जाएंगी। अगर बीजेपी विरोधी बाकी दल जैसे कि ऐआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है तो यह संख्या 106 हो जाएगी। अब बहुमत में केवल 8 सीटों की कमी रह जाती है।
बतादें कि दो दशकों के बाद बाल ठाकरे के बेटे उद्धव और भतीजे राज ठाकरे साथ आए थे। इसके बाद भी उनके साथ आने का फायदा नहीं मिल पाया। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ठाकरे परिवार की बड़ी हार है। हालांकि एकनाथ शिंदे की पार्टी से तुलना करें तो उद्धव की पार्टी काफी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बीएमसी में उद्धव ठाकरे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
