इसी बात को लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच पहले बहस हुई और फिर देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया।
घटना की जानकारी मिलते ही शंकराचार्य स्वयं आक्रोशित हो गए और अपने शिष्यों की रिहाई की मांग पर अड़ गए। मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़कर अनुरोध भी किया, लेकिन शंकराचार्य नहीं माने। करीब दो घंटे तक मौके पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और संगम क्षेत्र में गहमागहमी रही।
इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के और समर्थकों को हिरासत में ले लिया और उनकी पालकी को खींचते हुए संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का एक हिस्सा टूट भी गया।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि मौनी अमावस्या के कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ है। अब तक करीब 3 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं, जबकि प्रशासन का अनुमान है कि दिन खत्म होने तक यह संख्या 4 करोड़ तक पहुंच सकती है। भीड़ नियंत्रण के लिए मेला क्षेत्र में AI आधारित सिस्टम, CCTV कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। करीब 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है और 8 किलोमीटर लंबे अस्थायी घाट बनाए गए हैं।
