नई दिल्ली । उज्जैन/वाराणसी: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए पिछले कुछ वर्ष काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन अब उनके अच्छे दिन आने के संकेत मिल रहे हैं। शनि देव, जो कुंभ राशि के स्वामी भी हैं, जल्द ही अपना गोचर पूरा कर कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती के कष्टों से पूरी तरह मुक्त करने वाले हैं।
कुंभ राशि और शनि का गहरा संबंध
कुंभ राशि के अधिपति स्वयं शनि देव हैं और इस राशि के आराध्य देव भगवान शिव (महादेव) माने जाते हैं। इस राशि के जातकों का शुभ रंग आसमानी और भाग्यशाली अंक 10 व 11 होता है। वर्तमान में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। चूंकि शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, इसलिए उनके संचरण का प्रभाव बहुत गहरा और लंबे समय तक रहने वाला होता है।
साढ़ेसाती का अंतिम चरण: अब मिलेगी राहत
कुंभ राशि के जातक फिलहाल शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण तीसरे चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, साढ़ेसाती का अंतिम चरण जाते-जाते व्यक्ति को उसके संघर्षों का फल देकर जाता है। वर्तमान स्थिति: कुंभ राशि वालों को पिछले कुछ समय से करियर में अनिश्चितता, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा था। बदलाव का संकेत: शनि के अगले राशि परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि साढ़ेसाती के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी। इसके बाद जातकों के जीवन में मानसिक शांति, वित्तीय स्थिरता और रुके हुए कार्यों में गति आएगी।
भाग्य परिवर्तन और नए अवसर
शनि के साढ़ेसाती से मुक्त होते ही कुंभ राशि के जातकों के लिए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत हो सकती है। करियर में उन्नति: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और व्यापारियों को नए निवेश से भारी लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक लाभ: लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है और पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य में सुधार: साढ़ेसाती के कारण चल रही पुरानी बीमारियों और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।
महादेव और शनि की कृपा पाने के उपाय
कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के इस अंतिम दौर को सुखद बनाने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए शिव उपासना: चूंकि कुंभ के आराध्य महादेव हैं, इसलिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। शनिवार का दान: शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल व काली उड़द का दान करें। अनुशासन और सेवा: शनि देव अनुशासन प्रिय हैं, इसलिए असहाय लोगों की मदद करें और अपने आचरण को शुद्ध रखें। कुंभ राशि वालों के लिए यह समय धैर्य रखने का है। जैसे ही शनि का गोचर पूर्ण होगा, आपके जीवन की बाधाएं स्वतः दूर होने लगेंगी और भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा।