माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले इन गुप्त नवरात्रों का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहलाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र माने गए हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र-सिद्धि और यंत्र आराधना के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें साधक सामान्य जन से गुप्त रूप से करते हैं।
इस बार पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी, सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की साक्षी में माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के दौरान कुल छह शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना को और अधिक प्रभावशाली बना रहा है। साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल भी इसी समय चल रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर सहित उज्जैन के अन्य देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता का नित्य नए स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। हरसिद्धि मंदिर में संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूरे नौ दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र के दौरान की गई साधना अत्यंत शीघ्र फल देने वाली होती है। साधक इस अवधि में शक्ति उपासना के साथ-साथ अपने आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों मां दुर्गा अपने साधकों की गुप्त तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें सिद्धि, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का वरदान देती हैं। इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि योग और अनेक शुभ ग्रह संयोगों के बीच प्रारंभ हुए माघी गुप्त नवरात्र श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर लेकर आए हैं।
