अटल पेंशन योजना: कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक सुरक्षा
अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत 60 साल की उम्र के बाद हर महीने 1,000 से 5,000 रुपए तक की गारंटीड पेंशन मिलती है, जो व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है। 19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं, जिससे यह देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक मजबूत कड़ी बन चुकी है। कैबिनेट ने इसके टिकाऊ संचालन के लिए आवश्यक गैप फंडिंग जारी रखने का भी निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि योजना का विस्तार भारत को पेंशन आधारित समाज बनाने में मदद करेगा और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।
सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता
कैबिनेट ने एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के लिए सिडबी को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने को भी मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय सेवा विभाग के माध्यम से तीन चरणों में दी जाएगी—वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़, जबकि 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपए। इस पूंजी से सिडबी अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकेगा और एमएसएमई को अधिक मात्रा में सस्ता कर्ज उपलब्ध करा पाएगा। सरकार के अनुसार, इस निवेश के बाद वित्तीय सहायता पाने वाले एमएसएमई की संख्या 76.26 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है, यानी करीब 25.74 लाख नए एमएसएमई को फायदा होगा।
रोजगार और आर्थिक समावेशिता पर असर
सिडबी के समर्थन से एमएसएमई सेक्टर को अधिक फाइनेंस उपलब्ध होगा और इससे लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है, क्योंकि औसतन हर एमएसएमई करीब चार लोगों को रोजगार देता है। सरकार ने बताया कि आने वाले वर्षों में सिडबी की बैलेंस शीट पर जोखिम भारित परिसंपत्तियां बढ़ेंगी, क्योंकि बैंक डिजिटल और बिना गारंटी वाले कर्ज, स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेट और एमएसएमई को ज्यादा फाइनेंस देने पर जोर दे रहा है। ऐसे में मजबूत पूंजी आधार आवश्यक है ताकि सीआरएआर (कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेश्यो) सुरक्षित रहे और बैंक की क्रेडिट रेटिंग भी मजबूत बनी रहे।
समावेशी और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा
अटल पेंशन योजना से करोड़ों लोगों को बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, तो वहीं सिडबी को दी गई इक्विटी मदद से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज, ज्यादा रोजगार और मजबूत विकास का रास्ता मिलेगा। ये दोनों फैसले देश की अर्थव्यवस्था को समावेशी और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कदमों से न केवल कमजोर वर्गों और छोटे उद्योगों को फायदा होगा, बल्कि राष्ट्रीय रोजगार और आर्थिक विकास में भी मजबूती आएगी।
