कैबिनेट की मंजूरी और प्रस्ताव
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्ताव आए, जिनमें से 30 को मंजूरी मिली। योजना के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञ, संस्कृत शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षक और मानदेय पर कार्यरत शिक्षक भी आईपीडी (अंत:रोगी विभाग) के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इस सुविधा का लाभ उनके आश्रित परिवार भी उठा सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के अनुसार इस योजना से लगभग 2.97 लाख लोग सीधे लाभान्वित होंगे, जिसके लिए 89.25 करोड़ रुपए का व्यय अनुमानित है।
बेसिक शिक्षा परिषद के कर्मियों को भी मिलेगा लाभ
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के वार्डेन, पूर्णकालिक/अंशकालिक शिक्षक और प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों के आश्रित भी योजना से जुड़ सकेंगे। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना से 11.95 लाख से अधिक शिक्षक और कर्मी लाभान्वित होंगे। प्रति कर्मी सालाना लगभग 3,000 रुपए प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपए वार्षिक व्यय अनुमानित है।
निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज
योजना के तहत इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी। स्व वित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक योजना का लाभ वेरिफिकेशन के बाद उठा सकेंगे। जनपद स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में वेरिफिकेशन कमेटी गठित की जाएगी। पहले से किसी अन्य केंद्र या राज्य स्वास्थ्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से लाभ प्राप्त करने वाले इस योजना में शामिल नहीं होंगे।
योगी सरकार की यह पहल शिक्षा क्षेत्र के कर्मियों और उनके परिवारों के लिए जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अहम कदम है। सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा से लाखों शिक्षकों और शिक्षामित्रों को चिकित्सा खर्च की चिंता से राहत मिलेगी, जिससे उनका ध्यान शिक्षा और बच्चों की उन्नति पर केंद्रित रहेगा।
