भोपाल, 19 फरवरी । पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी ने 25 जून 1975 की रात को भारतीय लोकतंत्र का “काला अध्याय” बताते हुए कहा कि उस समय संविधान की आत्मा पर प्रहार किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी की कल्पना करते ही आज भी शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है, क्योंकि मैंने उस दौर को स्वयं भोगा है।
पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी गुरुवार को राजधानी भोपाल स्थित सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में ‘आपातकाल और युवा’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम देश में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के तत्वाधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कैलाश सोनी ने नई पीढ़ी को लोकतंत्र के संघर्षमय इतिहास से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद किया गया। प्रेस पर कठोर सेंसरशिप लागू की गई और मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया गया। यह केवल सत्ता का केंद्रीकरण नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा थी।
लोकतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, जीवन मूल्य है
कैलाश सोनी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र मात्र चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों और जनसहभागिता से जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस स्वतंत्र वातावरण में अपने विचार व्यक्त कर पा रही है, वह अनेक लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान की दूसरी आजादी के लिए अनेक लोगों ने जेलों में यातनाएं सही। यह संघर्ष केवल राजनीतिक परिवर्तन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को बचाने का अभियान था।
युवाओं को दी ऐतिहासिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास की भूलों से सीख लेना आवश्यक है। यदि युवा वर्ग संविधान के मूल्यों के प्रति सजग रहेगा, तो भविष्य में कोई भी सत्ता नागरिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकेगी। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र का प्रहरी बनने का आह्वान किया।
अंत में कैलाश सोनी ने दोहराया कि लोकतंत्र की रक्षा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की जिम्मेदारी है। यदि नई पीढ़ी संघर्ष की इस गाथा को आत्मसात करेगी, तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक सशक्त होगा।
प्रमुख वक्ताओं ने भी रखे विचार
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए चेतावनी है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि आपातकाल ने यह सिद्ध किया कि जब समाज जागृत होता है, तो लोकतंत्र पुनः स्थापित होता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
