आमलकी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से रखने पर सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। आंवले के वृक्ष में नारायण का निवास माना जाता है, इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करना अत्यंत फलदायी है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं।
रंगभरी एकादशी का संबंध शिव और पार्वती से भी है। धार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे और माता पार्वती का गौना इसी दिन हुआ था। यही कारण है कि इस दिन से रंगों के पर्व होली का जश्न भी शुरू माना जाता है।
दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी की एकादशी तिथि रात 10:32 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू होगी। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10:48 बजे तक रहेगा, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। योग आयुष्मान शाम 7:44 बजे तक रहेगा। करण वणिज सुबह 11:31 बजे तक रहेगा और उसके बाद विष्टि करण रहेगा।
शुभ योगों की बात करें तो सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 बजे से अगले दिन 6:47 बजे तक रहेगा, वहीं रवि योग सुबह 6:48 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। सूर्योदय शुक्रवार को 6:48 बजे और सूर्यास्त 6:20 बजे होगा।
शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 बजे से 3:15 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक रहेगा।
अशुभ समय में राहुकाल सुबह 11:08 बजे से 12:34 बजे तक, यमगण्ड दोपहर 3:27 बजे से 4:53 बजे तक, गुलिक काल सुबह 8:15 बजे से 9:41 बजे तक और दुर्मुहूर्त सुबह 9:07 बजे से 9:53 बजे तक रहेगा। भद्रा दोपहर 11:31 बजे से रात 10:32 बजे तक रहेगी।इस प्रकार 27 फरवरी की आमलकी या रंगभरी एकादशी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इस दिन के शुभ मुहूर्त और व्रत पालन से जीवन में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
