Marengo Asia Hospitals की सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका हेमराजानी के अनुसार, लंबे समय तक बहुत टाइट हेलमेट पहनने से ‘ट्रैक्शन एलोपेसिया’ नामक स्थिति विकसित हो सकती है। यह हेयर लॉस का एक प्रकार है, जो बालों की जड़ों पर लगातार खिंचाव और दबाव पड़ने से होता है। जब हेलमेट जरूरत से ज्यादा कसकर पहना जाता है, तो स्कैल्प के कुछ हिस्सों पर लगातार रगड़ और दबाव बनता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स कमजोर पड़ सकते हैं।
इसके अलावा, हेलमेट के अंदर जमा पसीना, गर्मी और प्राकृतिक तेल भी स्कैल्प की सेहत को प्रभावित करते हैं। यदि हेलमेट के अंदरूनी पैड नियमित रूप से साफ नहीं किए जाएं, तो उनमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो डैंड्रफ, खुजली और बाल झड़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई लोग लंबे बालों को कसकर बांधकर हेलमेट पहनते हैं, जिससे जड़ों पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि, इस समस्या से बचाव संभव है। सबसे पहले, सही फिट वाला हेलमेट चुनना जरूरी है, जो सिर पर सुरक्षित बैठे लेकिन अत्यधिक दबाव न डाले। वेंटिलेशन की सुविधा वाला हेलमेट स्कैल्प को सांस लेने का मौका देता है। हेलमेट पहनने से पहले सूती या पसीना सोखने वाली इनर कैप का इस्तेमाल करने से रगड़ और नमी कम होती है। हेलमेट के अंदरूनी पैड को समय-समय पर धोना और पूरी तरह सुखाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
यदि हेयरलाइन पीछे जाने लगे, बाल पतले दिखें या असामान्य रूप से झड़ने लगें, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती चरण में ट्रैक्शन एलोपेसिया को नियंत्रित किया जा सकता है। टॉपिकल मिनोक्सिडिल, पीआरपी थेरेपी, हेयर पेप्टाइड्स और लो-लेवल लाइट थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं, जो स्कैल्प में रक्त संचार बढ़ाकर नए बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि हेलमेट छोड़ना समाधान नहीं है। सही तरीके से फिट और साफ-सुथरा हेलमेट पहनकर आप अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं और बालों की सेहत भी बनाए रख सकते हैं।
