तिथि और नक्षत्र का संयोग
दृक पंचांग के अनुसार बुधवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शाम 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। हालांकि उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन प्रतिपदा का ही मान रहेगा।
नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। योग धृति सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
सूर्योदय सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। दिन की कुल अवधि धार्मिक कार्यों के लिए संतुलित मानी जा रही है।
दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त
4 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, जप, साधना और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह समय अनुकूल है।
गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक है। यह संध्या पूजन और विशेष अनुष्ठान के लिए शुभ माना जाता है।
अमृत काल देर रात 12 बजकर 54 मिनट से 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ या कोई मांगलिक कार्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
अशुभ समय का रखें ध्यान
पंचांग के अनुसार राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 2 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
यमगंड सुबह 8 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 38 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, वर्ज्य दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 41 मिनट तक प्रभावी रहेगा। साथ ही आडल योग सुबह 7 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन अशुभ कालों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यात्रा या अन्य मांगलिक कार्य करने से परहेज करना चाहिए।
बुधवार का धार्मिक महत्व
बुधवार का दिन विघ्न विनाशक भगवान गणपति और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजा करने और हरे वस्त्र या मूंग का दान करने से बुध ग्रह शांत होते हैं और बुद्धि, व्यापार व संचार से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से नए मास की शुरुआत होने के कारण यह दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए भी उत्तम माना गया है।
