नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) ने आगामी असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) के लिए पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें कुल 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस सूची के अनुसार, असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) जोरहाट विधानसभा क्षेत्र (Jorhat Assembly Constituency) से चुनाव लड़ेंगे। यह कदम चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले उम्मीदवारों के नाम सामने लाकर कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है। असम में 2016 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से प्रभावशाली और स्थानीय स्तर पर मजबूत नेता चुने हैं, ताकि मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ बनाई जा सके।
सूची में कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया को नजीरा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरचल्ला सीट से टिकट मिला है। इसके अलावा अब्दुस सोबहान अली सरकार गौरीपुर, मार्कलाइन मराक गोलपारा वेस्ट (अनुसूचित जनजाति आरक्षित), गिरीश बरुआ बोंगाईगांव और महानंद सरकार बरपेटा (अनुसूचित जाति आरक्षित) से चुनाव लड़ेंगे। रामेन सिंह राभा बोको-चायगांव (ST), नंदिता दास हाजो-सुआलकुची (SC) और सत्यब्रत कलिता कमलपुर सीट से मैदान में होंगे। इन नामों के चयन में पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया है।
किसे कहां से मिला टिकट
प्रमुख उम्मीदवारों में मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को डिस्पुर, दिगंत बर्मन को बरखेत्री और अशोक कुमार शर्मा को नलबाड़ी से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने आरक्षित सीटों पर भी मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं, जो अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने में सहायक साबित हो सकते हैं। यह सूची पार्टी की संगठनात्मक ताकत और चुनावी तैयारियों को दिखाती है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा में तेजी दिखाकर सत्ताधारी दल को संकेत दिया है कि वह इस बार असम में कड़ी चुनौती पेश करेगी।
रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश
असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव अप्रैल महीने में होने की संभावना है। पिछले कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले इस राज्य में कांग्रेस वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करके पार्टी ने रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश की है। विश्लेषकों का मानना है कि आगे आने वाली सूचियां और संगठनात्मक प्रयास मिलकर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। यह चुनाव असम की राजनीति में अहम मोड़ साबित हो सकता है, जहां कांग्रेस पुरानी ताकत वापस हासिल करने की कोशिश में जुटी है।
