सावित्री बाई ने यह काढ़ा पहले खुद पीया और फिर अपने बेटे शिवम उम्र 22 साल और बेटी रेखा उम्र 24 साल को भी पिला दिया। जैसे ही तीनों ने यह काढ़ा लिया, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। तेज चक्कर आने लगे, लगातार उल्टियां होने लगीं और शरीर सुन्न पड़ गया।
परिवार की यह हालत देख उनके परिजन तुरंत उन्हें पन्ना जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने इसे गंभीर फूड पॉइजनिंग का मामला बताया। तुरंत चिकित्सा मिलने के कारण बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना इस बात का सबूत है कि जड़ी-बूटियों का बिना विशेषज्ञ सलाह के सेवन जानलेवा हो सकता है।
डॉक्टरों ने कहा कि धतूरा जैसी जड़ी-बूटियां बेहद खतरनाक होती हैं। यदि उनका सेवन नियंत्रित मात्रा में और चिकित्सकीय निगरानी में न किया जाए, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। सावित्री बाई और उनके बच्चों को अस्पताल में इलाज दिया जा रहा है और अब धीरे-धीरे उनकी हालत स्थिर हो रही है।
यह घटना न सिर्फ पन्ना के लोगों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे देश में यह याद दिलाती है कि घरेलू नुस्खों और जड़ी-बूटियों के सेवन में अति सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। नीम हकीम खतरा-ए-जान, का संदेश सच साबित हुआ।
परिवार की यह गलती बस दर्द से राहत पाने की कोशिश थी, लेकिन इसका परिणाम अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था तक पहुंच गया। विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी प्रकार की जड़ी-बूटियों या घरेलू औषधियों का सेवन करने से पहले हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि पारंपरिक घरेलू नुस्खे अक्सर खतरनाक हो सकते हैं। खासकर धतूरा और गरज जैसी जड़ी-बूटियां, जो कि शरीर के लिए जहर साबित हो सकती हैं। समय पर इलाज और अस्पताल पहुंचना ही इस परिवार की जान बचाने वाला मुख्य कारण बना।
पन्ना के लोगों के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज केवल प्रमाणित और चिकित्सकीय तरीके से ही किया जाना चाहिए। किसी भी तरह का जोखिम लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
