नामांकन के दौरान अमित शाह की मौजूदगी ने इस प्रक्रिया को और भी राजनीतिक रूप से अहम बना दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है।
इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पटना में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। उन्होंने अपने संदेश में जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा बनाए रखा है और उसी विश्वास के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ की है।
अपने पोस्ट में नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि उनके संसदीय जीवन की शुरुआत से ही यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी भावना के तहत उन्होंने इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा जताई है और चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया है।
गौरतलब है कि Election Commission of India ने 18 फरवरी को देश के 10 राज्यों में खाली हो रही 37 सीटों के लिए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इन सीटों पर चुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होने वाला है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा। इसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
नामांकन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे जहां उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary सहित कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान राज्यसभा चुनाव के साथ साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा की गई।
