प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
