दरअसल उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बन गई थी। क्षेत्र के कुछ लोगों का कहना था कि इस परियोजना के कारण उन्हें नुकसान हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर विधायक अनिल जैन ने जनता का समर्थन करते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दे दी थी। उनका कहना था कि यदि स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
विधायक के इस बयान के बाद मामला तेजी से राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। चूंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है ऐसे में सत्तारूढ़ दल के ही विधायक द्वारा सरकारी परियोजना के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी देना पार्टी नेतृत्व को असहज कर गया। मामला जल्द ही मुख्यमंत्री मोहन यादव और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में पहुंच गया।
इसके बाद विधायक अनिल जैन को मुख्यमंत्री आवास तलब किया गया। यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के प्रदेश प्रभारी भी मौजूद थे। बैठक के दौरान विधायक को साफ तौर पर समझाया गया कि सरकार की विकास योजनाओं के खिलाफ इस तरह का सार्वजनिक विरोध उचित नहीं है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में विधायक को कड़ी फटकार लगाई गई और पार्टी अनुशासन का ध्यान रखने की सलाह दी गई। नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर समस्या है तो उसे संगठन और सरकार के भीतर उठाया जाना चाहिए न कि सार्वजनिक आंदोलन के जरिए।
बैठक के बाद विधायक अनिल जैन ने अपने तेवर नरम कर लिए और आंदोलन की घोषणा को वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया है और अब सड़क चौड़ीकरण के काम का विरोध नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखकर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में यह संदेश भी गया है कि पार्टी नेतृत्व सरकारी योजनाओं को लेकर किसी भी तरह की सार्वजनिक असहमति को गंभीरता से ले रहा है। फिलहाल उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रहने की संभावना है और प्रशासन भी इस परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया पर काम कर रहा है।
