प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देश की प्रगति को समाज के चार प्रमुख वर्गों की उन्नति से जोड़ते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसी दृष्टि से मध्यप्रदेश सरकार ने महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण अभियान सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका लाभ लाखों महिलाएं और बालिकाएं उठा रही हैं।
प्रदेश में एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के तहत 453 परियोजनाओं के अंतर्गत 97 हजार 882 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं जिनके माध्यम से लगभग 84 लाख हितग्राहियों को सेवाएं दी जा रही हैं। आंगनवाड़ियों में जियो फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली से शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026 27 में सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 कार्यक्रम के लिए 3 हजार 768 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
पोषण 2.0 के अंतर्गत मातृ एवं शिशु पोषण गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार और निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से आंगनवाड़ियों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रदेश में फेस मैचिंग प्रणाली के जरिए 94 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन किया जा चुका है जो देश में सर्वाधिक है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना के माध्यम से 60 लाख से अधिक बच्चों गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। इस वर्ष के बजट में पोषण आहार के लिए 1 हजार 150 करोड़ और पोषण अभियान के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से वर्ष 2025 में पंजीकृत 7.37 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर तक लाया गया है। झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रदेश में 5 हजार 263 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कार्य जारी है वहीं लगभग 38 हजार 900 आंगनवाड़ी भवनों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। भवन निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना प्रदेश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना बन चुकी है। वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 52 हजार 305 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026 27 में इस योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत अब तक 52.56 लाख बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है जिसके लिए 1 हजार 801 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
महिला सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं जबकि 8 नए केंद्रों को स्वीकृति दी गई है। महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से इस वर्ष 1.43 लाख से अधिक मामलों का निराकरण किया गया है। भोपाल और इंदौर में सखी निवास संचालित हैं तथा 8 नए वर्किंग वूमन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा शक्ति सदन शौर्या दल योजना और समेकित बाल संरक्षण योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं और बच्चों को संरक्षण और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा रही है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से हजारों स्व सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को आर्थिक सहायता और ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को कुल 32 हजार 730 करोड़ 45 हजार रुपये का बजट आवंटित किया गया है जो महिलाओं और बच्चों के कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन योजनाओं और प्रयासों के चलते मध्यप्रदेश में महिलाएं आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
