शिव परिवार को चढ़ाया हर्बल रंग
इस अवसर पर भगवान महाकाल, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को हर्बल रंग अर्पित किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल भी अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक पंचामृत, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से किया गया।
कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाया गया।
भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पमाला अर्पित की गई।
भोग में फल और मिष्ठान रखा गया।
सुरक्षा और प्रतिबंध
दो साल पहले धुलेंडी पर गर्भगृह में आग लगने की घटना के बाद इस बार भक्तों और पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई।सुबह दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सख्त सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश मिला।गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का रंग, गुलाल लाना, उड़ाना या एक-दूसरे को लगाना प्रतिबंधित रहा।विशेष उपकरण से रंग उड़ाने पर भी सख्त रोक लगाई गई।
विशेष बातें
इस साल भी रंगपंचमी की शुरुआत भस्म आरती और हर्बल रंग अर्पित करने की परंपरा के अनुसार हुई। मंदिर परिसर में शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह सक्रिय रहे।
