मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बाबा महाकाल के चरणों में दंडवत होकर प्रणाम किया और आशीर्वाद लिया। पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में इस दौरान धार्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने भी मुख्यमंत्री के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए।
रंग पंचमी के इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने उज्जैन की पारंपरिक और ऐतिहासिक महाकाल गेर से जुड़ी परंपराओं का भी पालन किया। उन्होंने महाकाल की गेर के ध्वज का विधि-विधान से पूजन किया। यह गेर उज्जैन की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है और हर वर्ष रंग पंचमी के अवसर पर बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाती है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भगवान वीरभद्र का भी पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने अखाड़ों में रखे पारंपरिक शस्त्रों का पूजन कर उनका संचालन और प्रदर्शन भी किया। अखाड़ा परंपरा के अनुसार यह शस्त्र पूजन वीरता और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री द्वारा शस्त्र संचालन के प्रदर्शन ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं और संत समाज का उत्साह बढ़ाया।
दरअसल उज्जैन में रंग पंचमी के दिन महाकाल की गेर का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर शहर में पारंपरिक गेर और चल समारोह निकाले जाते हैं जिनमें हजारों श्रद्धालु और भक्त शामिल होते हैं। शाम के समय भगवान वीरभद्र ध्वज चल समारोह भी निकाला जाएगा जिसमें संत समाज अखाड़ों के साधु और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।
रंग पंचमी के अवसर पर उज्जैन में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ढोल-ताशों गुलाल और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा शहर भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आता है। महाकाल मंदिर में दर्शन और पूजन के साथ ही मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस पर्व को और भी विशेष बना दिया।
