वारदात: सुबह 5 बजे, टॉयलेट के पास ‘बॉडी बिल्डर’ का हमला
आशुतोष महाराज के अनुसार, वे वेस्ट यूपी संयोजक सुधांशु सोम के साथ सफर कर रहे थे। सुबह करीब 5 बजे जब ट्रेन फतेहपुर और सिराथू के बीच थी, तब वे बाथरूम की ओर जा रहे थे। तभी एक ‘नकाबपोश नहीं बल्कि खुले चेहरे’ वाले हट्टे-कट्टे हमलावर ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे व हाथ पर कई वार किए। आशुतोष ने बताया कि उन्होंने जान बचाने के लिए हमलावर से हाथापाई की और किसी तरह खुद को बाथरूम में लॉक कर लिया। वे तब तक बाहर नहीं आए जब तक जीआरपी की टीम मौके पर नहीं पहुँच गई।
आरोप: “कोर्ट में सबूत न दे पाऊं, इसलिए रची गई हत्या की साजिश”
अस्पताल के बेड से आशुतोष महाराज ने सीधे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर उंगली उठाई है। उन्होंने दावा किया कि:
वजह: पॉक्सो एक्ट के तहत उन्होंने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके पुख्ता सबूत वे कोर्ट में पेश न कर पाएं, इसलिए यह हमला कराया गया।
इनाम की घोषणा: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नाक काटने के लिए एक लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया था, जिसमें दिनेश फलाहारी और मुकुंदानंद जैसे नाम शामिल हैं।
फेसबुक पोस्ट का रहस्य: इस हमले की कथित जिम्मेदारी ‘डॉ. स्वाति अघोरी’ नाम के फेसबुक अकाउंट से ली गई है, जिसमें लिखा गया— “बोला था न हमारे लोगों के हत्थे मत चढ़ना।” पुलिस अब इस अघोरी साधक के प्रोफाइल की सत्यता की जांच कर रही है।
पलटवार: “यह सब सुरक्षा पाने का बनावटी ड्रामा है”
वहीं, दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘मीडिया अटेंशन’ पाने का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि:
बनावटी हमला: शंकराचार्य के अनुसार, अटेंडेंट का कहना है कि बाथरूम जाने तक वे ठीक थे, फिर अचानक यह हाल कैसे हो गया? यह सब सरकारी सुरक्षा हासिल करने का प्रपंच है।
रेलवे सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि क्या अब भारत की ट्रेनें सुरक्षित नहीं रह गई हैं? जीआरपी कहाँ थी?
ध्यान भटकाने की कोशिश: उन्होंने इसे अपनी धार्मिक यात्रा से लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया।
वर्तमान स्थिति: मेडिकल जांच और पुलिसिया शिकंजा
फिलहाल आशुतोष महाराज का प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनके चेहरे के गहरे घावों को देखते हुए CT स्कैन और एक्स-रे कराया है। आशुतोष ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है और वे सहारे के बिना चल भी नहीं पा रहे हैं। जीआरपी ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और प्रयागराज सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल तक भारी पुलिस बल तैनात है।
निष्कर्ष
“चलती ट्रेन के सुरक्षित कोच में इस तरह का हमला न केवल रेलवे सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि धर्म और कानून की इस जंग में ‘नाक’ का सवाल अब जान पर बन आया है। पुलिस के लिए अब दूध का दूध और पानी का पानी करना एक बड़ी चुनौती है।”
