नई दिल्ली: सलीम खान का नाम सुनते ही हिंदी सिनेमा के कई क्लासिक फिल्में और सुपरस्टार याद आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सलीम खान खुद एक्टर बनने मुंबई आए थे? बचपन में अनाथ होने के बावजूद उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और छोटी-छोटी भूमिकाओं से शुरुआत की।
सलीम अब्दुल रशीद खान के पूर्वज अफगानिस्तान से भारत आए थे और परिवार बाद में इंदौर में बस गया। बचपन में ही माता-पिता का साया खोने के बाद दस साल की उम्र में वह अनाथ हो गए। फिर भी बड़े सपने लेकर मुंबई आए। मरीन ड्राइव के गेस्ट हाउस में 55 रुपये महीने देकर आधा कमरा किराए पर लिया और गुजारे के लिए मॉडलिंग की। 1960 में फिल्म ‘बारात’ से डेब्यू किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। कई फिल्मों में काम किया, लेकिन एक्टर के तौर पर पहचान नहीं बन पाई। खुद सलीम मानते थे कि वह बड़े एक्टर नहीं हैं, लेकिन किरदार को समझने और गढ़ने में माहिर थे।
एक्टर के रूप में संघर्ष के बाद सलीम खान ने लेखन की राह चुनी। जावेद अख्तर के साथ उनकी जोड़ी ‘सलीम-जावेद’ बनी, जिसने हिंदी सिनेमा में इतिहास रचा। उनकी लेखनी से बनी फिल्में जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन ने अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ का टाइटल दिलाया और सलीम-जावेद को भी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिली।
सलीम खान ने 1964 में सलमा से शादी की। बाद में उन्होंने हेलेन से भी निकाह किया। वक्त के साथ परिवार ने हर रिश्ते को अपनाया और आज उनके बेटे सलमान खान बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं।
सलीम खान की कहानी यह सिखाती है कि कभी-कभी किस्मत और हुनर अलग-अलग राह चुनते हैं। खुद सुपरस्टार नहीं बने, लेकिन अपने जादुई कलम के दम पर न केवल अमिताभ बच्चन को एंग्री यंग मैन बनाया, बल्कि बेटे सलमान के जरिए बॉलीवुड में एक नई पीढ़ी का सितारा चमकाया।
