स्पेशल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: एक नहीं, तीन बार फांसी
यह मामला कानून के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भोपाल की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 18 मार्च 2025 को अतुल निहाले को तीन अलग-अलग धाराओं में फांसी की सजा सुनाई थी। नए कानून (BNS) के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में यह पहला ऐसा मामला था, जहाँ किसी दोषी को ‘तिहरी फांसी’ और साथ में दो बार उम्रकैद की सजा मिली थी। अदालत ने इसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ (Rarest of Rare) मामला करार देते हुए कहा था कि यदि मौत से भी बड़ी कोई सजा होती, तो आरोपी उसका भी पात्र होता।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: ‘कल्पना ही रूह कंपा देने वाली है’
जबलपुर हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा था कि 5 साल की मासूम ने जिस अमानवीय पीड़ा को सहा, उसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। कोर्ट ने माना था कि समाज में बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे दरिंदों को जीने का कोई हक नहीं है।
खौफनाक वारदात: पानी की टंकी में मिला था मासूम का शव
यह खौफनाक वारदात 24 सितंबर 2024 को हुई थी। आरोपी अतुल ने घर से किताबें लेने नीचे आई मासूम को अगवा किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। हैवानियत की हद तो तब पार हो गई जब उसने बच्ची के शव को तीन दिनों तक अपने घर के बाथरूम के ऊपर रखी पानी की टंकी में छिपाकर रखा। दुर्गंध आने पर जब पुलिस ने तलाशी ली, तब इस काले सच का खुलासा हुआ।
अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फांसी पर रोक लगाते हुए मामले का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कोर्ट अब यह परखेगा कि क्या सजा के निर्धारण में किसी कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी हुई है या नहीं। केस में 22 गवाह, डीएनए रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जैसे पुख्ता सबूत हैं।इस मामले में आरोपी की मां बसंती और बहन चंचल को भी सबूत छिपाने और आरोपी की मदद करने के जुर्म में दो-दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
