रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान के प्रधानमंत्री सप्ताहांत में Japan पहुंचे थे, जहां उन्होंने World Baseball Classic में ताइवान की टीम का समर्थन किया। हालांकि ताइवान सरकार ने साफ किया कि यह पूरी तरह निजी दौरा था और इसका किसी आधिकारिक कूटनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
ताइवानी मीडिया के अनुसार, 1972 में टोक्यो और ताइपे के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध टूटने के बाद यह पहला मौका है जब किसी मौजूदा ताइवानी प्रधानमंत्री ने जापान का दौरा किया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने आरोप लगाया कि चो जुंग-ताई “चुपके और गुप्त तरीके से” स्वतंत्रता समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जापान को ऐसे “उकसावे” की कीमत चुकानी पड़ सकती है।
जापान ने बताया निजी दौरा
जापान ने इस पूरे मामले के राजनीतिक महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश की है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव Minoru Kihara ने कहा कि टोक्यो इस यात्रा को निजी मानता है और इस दौरान ताइवानी प्रधानमंत्री तथा जापानी सरकारी अधिकारियों के बीच कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई।
हालांकि जापान और Taiwan के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों के बीच मजबूत आर्थिक, सांस्कृतिक और अनौपचारिक राजनीतिक रिश्ते मौजूद हैं।
ताइवान का चीन को जवाब
ताइवान ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि उसके नेताओं को अन्य देशों की यात्रा करने और उनसे संवाद करने का पूरा अधिकार है। ताइपे का कहना है कि चीन का ताइवान पर संप्रभुता का दावा निराधार है और द्वीप का भविष्य वहां की जनता तय करेगी।
ऐतिहासिक रूप से जटिल रिश्ते
ताइवान और जापान के रिश्ते इतिहास में काफी जटिल रहे हैं। Japan ने 1895 से लेकर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने तक ताइवान पर उपनिवेश के रूप में शासन किया था।
औपचारिक कूटनीतिक संबंध न होने के बावजूद दोनों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जारी है। 2022 में Lai Ching-te, जो उस समय ताइवान के उपराष्ट्रपति थे, Shinzo Abe की हत्या के बाद श्रद्धांजलि देने टोक्यो भी गए थे।
बीजिंग लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसकी किसी भी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का विरोध करता रहा है। चीन का कहना है कि ताइवान के नेताओं और विदेशी सरकारों के बीच अनौपचारिक या प्रतीकात्मक संपर्क भी उसके “एक चीन” सिद्धांत को कमजोर कर सकता है।
यही वजह है कि ताइवान के नेताओं के विदेश दौरों पर चीन अक्सर कड़ी प्रतिक्रिया देता रहा है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला।
