पांडे ने कोर्ट में आरोप लगाया कि एक कारोबारी ने उन पर जानलेवा हमला किया जिसके कारण उनकी पत्नी का गर्भपात हो गया। उन्होंने बताया कि मिसकैरेज के बाद वे भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। फरियादी ने यह भी दलील दी कि चुनाव लड़ने और सच बोलने के कारण उन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और स्थानीय पुलिस ने शिकायत के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन पर हमला हुआ है। चुनावी रंजिश और राजनीतिक मतभेदों के चलते वर्ष 2024 से लेकर अब तक कई बार उन पर हमला हो चुका है। पांडे का कहना है कि अब वे अपने परिवार की सुरक्षा के लिए और न्याय पाने के लिए न्यायालय के पास पहुंचे हैं।
कोर्ट में पेश की गई दलीलों में यह सामने आया कि पांडे लगातार धमकियों और हमलों का सामना कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि पुलिस और प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे इच्छा मृत्यु का विकल्प चुनने के लिए बाध्य होंगे।
वकीलों और कोर्ट अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री ने मामले की सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। कोर्ट ने फिलहाल सुरक्षा और मामले की त्वरित जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है।
यह मामला राज्य में राजनीतिक रंजिश चुनावी हिंसा और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। न्यायिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा संवेदनशीलता और कानूनी सहायता बेहद जरूरी होती है। हाईकोर्ट अब इस मामले में सुरक्षा उपायों आरोपों की जांच और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहा है।
पांडे की यह अपील न केवल व्यक्तिगत न्याय की मांग है बल्कि यह स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था की भी परीक्षा है कि वे संवेदनशील मामलों में कितनी तत्परता और जवाबदेही दिखा पाते हैं। अब राज्य प्रशासन और हाईकोर्ट की निगाह इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई पर है ताकि पीड़ित और उनके परिवार को सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाधान मिल सके।
