प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इजराइल और अमेरिका के प्रति गहरी नाराजगी जताई। शिया समुदाय ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध का जिम्मेदार बताया। अंजुमन निदा-ए-इस्लाम के बैनर तले आयोजित इस रैली में लोगों ने देश की राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि खामेनेई की शहादत ने पूरे मुस्लिम समुदाय को गहरा झकझोर दिया है।
जबलपुर के जव्वार हुसैन जैदी ने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई युद्ध कार्रवाई पूरी तरह से गलत है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाकर युद्ध रोकवाए क्योंकि युद्ध में हमेशा आम जनता का ही नुकसान होता है।
प्रदर्शनकारी सकीना फातिमा ने कहा कि वे फिलिस्तीन और ईरान के प्रति दुखी हैं और खामेनेई का बदला चाहते हैं। उनका कहना था कि खामेनेई ने शिया और सुन्नी समुदाय को भाई-भाई बताते हुए मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खामेनेई के हत्यारे को कड़ी सजा मिले और अमेरिकी नेतृत्व को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
सैयद उरोज अली ने कहा कि खामेनेई किसी एक मुसलमान के नहीं बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के नेता थे। उन्होंने बताया कि समुदाय उनकी मिशन को आगे बढ़ाएगा और अन्याय के खिलाफ खड़ा रहेगा, चाहे वह शिया हो या सुन्नी, हिंदी मुसलमान हो या देवबंदी। प्रदर्शनकारी प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कह रहे थे कि उन्होंने शांतिपूर्ण जुलूस निकालने की अनुमति दी।
शिया समुदाय ने प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया कि अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाएं। उनका कहना था कि देश का 36 करोड़ मुसलमान प्रधानमंत्री के फैसले की ओर देख रहा है और उन्हें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने शांति बहाली और मध्य-पूर्व में जारी युद्ध रोकने की भी मांग की।
