सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पीड़ित परिवार शुरू से ही आरोप लगाता रहा है कि आरोपियों को पूर्व मंत्री और स्थानीय रसूखदारों का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण पुलिस ने कभी निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।
रसूखदारों का साया और राजनीतिक संरक्षण
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मुख्य आरोपियों को पूर्व मंत्री का संरक्षण मिला था। इसी कारण 2019 में अंजना के साथ हुई छेड़छाड़ की शिकायत पर पुलिस ने कड़ी धाराएं नहीं लगाईं। इसके बाद गवाहों को धमकाने और हत्या की घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ।
पहले अंजना के भाई नितिन की पीट-पीटकर हत्या की गई।
इसके बाद मुख्य गवाह चाचा राजेंद्र की हत्या हुई।
पुलिस इन हत्याओं को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही।
अंजना की मौत और पुलिस की लापरवाही
सबसे बड़ी लापरवाही तब हुई जब मुख्य गवाह अंजना की संदिग्ध मौत हुई। चाचा राजेंद्र का शव एम्बुलेंस से लाते समय अंजना की मौत हो गई। पुलिस ने इसे गाड़ी से गिरना बताकर केस को रफा-दफा करने की कोशिश की।
हालांकि पोस्टमार्टम में अंजना के शरीर पर 14 गंभीर चोटें और सिर की हड्डी में 9 सेंटीमीटर का बड़ा फ्रैक्चर पाया गया, जो स्पष्ट हत्या की कहानी बयान करता है।
सियासी गलियारों में हलचल
मामला राज्य की सियासत में भी गरमा गया। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मृतका की मां से राखी बंधवाकर न्याय दिलाने की कसम खाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी परिवार से मिलकर सांत्वना दी।
लेकिन स्थानीय राजनीतिक दबाव के चलते पीड़ित परिवार को पुलिस जांच पर अविश्वास था।
अब होगी CBI जांच
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता (अंजना की मां ‘बड़ी बहू’) की ओर से वकील कोलिन गोंजाल्विस, मीनाक्षी अरोरा और मिनेश दुबे ने पक्ष रखा।
अब CBI की टीम सागर आएगी, पुलिस के अब तक के सभी रिकॉर्ड जब्त करेगी और मामले की निष्पक्ष जांच करेगी।गवाहों को धमकाने वाले ‘सफेदपोश’ चेहरे और पुलिस-नेताओं के गठजोड़ की जांच होगी।राजनीतिक संरक्षण देने वाले बड़े नेताओं से भी पूछताछ हो सकती है।पूरे मामले में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की संभावना बढ़ गई है।
