वारदात की जड़:60 लाख का इलाज और कड़वे बोल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नाबालिग लंबे समय से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है। उसके इलाज के लिए परिवार को अपनी पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी, जिसमें करीब 60 लाख रुपये खर्च हो गए। इसी आर्थिक तंगी और बीमारी के बोझ के चलते फरवरी में उनके पिता का भी निधन हो गया।
बड़ा भाई कृष्णकांत अक्सर छोटे भाई को यह कहकर प्रताड़ित करता था कि “तेरी बीमारी की वजह से सब बिक गया और पिता भी चले गए।” इन्हीं तानों से आहत होकर छोटे भाई ने भाई को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।
साजिश: मुंबई से कीमो कराकर लौटा और थाम लिया कट्टा
नाबालिग 9 मार्च को मुंबई से कीमोथेरेपी कराकर लौटा और अपने दोस्त अरमान खान के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की। अरमान ने दो देसी कट्टे और कारतूसों का इंतजाम किया। 11 मार्च को साजिश के तहत नाबालिग ने कृष्णकांत को मौसी के घर मिलने के बहाने बुलाया। जामपुरा रेलवे लाइन के पास दोनों भाइयों में बहस हुई, हाथापाई के दौरान नाबालिग का निशाना चूक गया, लेकिन पीछे खड़े दोस्त अरमान ने भागते हुए कृष्णकांत पर फायरिंग कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस की कार्रवाई: 100 कैमरे और ‘मुंडन’ का खेल
वारदात के बाद आरोपी मुरैना भाग गए और पहचान छिपाने के लिए अपने सिर मुंडवा लिए। पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के नेतृत्व में टीम ने 100 से अधिक CCTV कैमरों को खंगाला। जब नाबालिग घर से गायब मिला, तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया। रविवार को मुखबिर की सूचना पर फूप कस्बे के पास एक खाली कमरे से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
दोस्ती या पुरानी दुश्मनी?
सह-आरोपी अरमान खान के पिता की हत्या 20 साल पहले हुई थी, जिसका आरोप कृष्णकांत के चाचा पर था। पुलिस पूछताछ में अरमान ने कहा कि उसने “दोस्ती निभाने” के लिए गोली चलाई, लेकिन पुलिस इसे पुराने पारिवारिक विवाद और बदले की भावना से भी जोड़कर देख रही है।
एक और सनसनी: आष्टा में जमीन के लिए दो सगे भाई-बहनों का कत्ल
अभी भिंड का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि सीहोर के आष्टा (धर्मपुरी) से एक और रूह कंपा देने वाली खबर आई। यहाँ जमीन विवाद में एक ताऊ (हरिसिंह मालवीय) ने अपने ही छोटे भाई के दो जवान बच्चों, शीतल (20) और कुलदीप (19) की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को हिरासत में ले लिया है।
