गैस गैजेट पर चिंता
ऑटो सेक्टर में सबसे बड़ी चिंता गैस पेट्रोल को लेकर है। कई मैन्युफैक्चरिंग स्टोर्स में गैस का अहम उपयोग होता है, जैसे कि पेंट शॉप, एस्बेस्टस यूनिट और फोर्जिंग। यदि गैस की कमी बनी रहती है तो कच्चे माल की कीमत बढ़ सकती है और उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। एनडीटीवी प्रोफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, कई सप्लायर्स ने सबसे पहले मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण देरी की समस्याओं की जानकारी दी है। विशेष रूप से कतर से गैस गैसोलीन लगभग बंद हो गया है, क्योंकि वहां ईरान के मिसाइलों और तूफान तूफान से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
कंपनी के पास ऑटोमोबाइल स्टॉक
नोएडा के पास 4 से 6 ग्रेटर का कंपोनेंट स्टॉक मौजूद है, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिल गई है। इंस्टीट्यूट इंस्टीट्यूट्स का कहना है कि अगर संकट दो महीने के लिए बचा है, तो वास्तविक समस्याएं शुरू हो सकती हैं, खासकर उन कॉलेजों में जहां ज्यादा ऊर्जा की जरूरत है।
फ़्रॉस्ट चेन स्थिर लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम
बड़ी ऑटो कंपनी ने कहा है कि उनके उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। सरकार के अनुसार, शैतान चेन अभी स्थिर है, लेकिन शीशों पर नजर रखी जा रही है। सप्लायर्स के साथ लगातार संपर्क में हैं, विशेष रूप से उन सप्लायर्स के साथ जो महत्व या गैस पर मुख्य रूप से सहमत हैं। संस्था के अधिकारियों ने कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है और ऋण अधिग्रहण पर तुरंत निर्णय लेने की तैयारी है।
अलग-अलग इंजीनियरों की गैस कंपनी
रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग कंपनियों में गैस पर कारोबार अलग-अलग है। मारुति सुजुकी की फैक्ट्रियों में गैस पर लगभग 74 प्रतिशत है, जबकि महिंद्रा और महिंद्रा में 38 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 33 प्रतिशत और हुंडई मोटर में 31 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि यदि गैस स्टेशन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग तरह का प्रभाव पड़ता है।
भविष्य की चुनौती
भारत का ऑटो सेक्टर इस संकट से सुरक्षित नजर आ रहा है। लेकिन आने वाले हफ्ते बेहद अहम होंगे, जो तय करेंगे कि केवल रामबाण की मांग सीमित है या बड़े पैमाने पर संकट में है। औद्योगिक अधिकारियों का आरोप है कि व्यापारी डूबे हुए हैं और किसी भी स्थिति में तुरंत मैडम कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
