इंदौर संभाग में इस बार कुल 1.91 लाख किसानों ने गेहूं बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकारी खरीद व्यवस्था पर किसानों का भरोसा बढ़ा है। पूरे प्रदेश की बात करें तो करीब 19.04 लाख किसानों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है, जो राज्य में व्यापक स्तर पर होने वाली खरीदी को दर्शाता है।
जिलावार आंकड़ों की बात करें तो इंदौर जिले में सबसे अधिक 71,713 किसानों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद धार में 44,466, खंडवा में 35,104, खरगोन में 27,557 और झाबुआ में 7,120 किसानों ने पंजीकरण कराया है। वहीं बड़वानी में 4,724, बुरहानपुर में 523 और अलीराजपुर में 476 किसानों ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया है। इन आंकड़ों से साफ है कि पूरे संभाग में किसानों ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि इंदौर के साथ-साथ उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में भी 1 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू की जाएगी। जबकि अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 7 अप्रैल से प्रारंभ होगी। खरीद का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित किया गया है और यह केवल सरकारी कार्यदिवसों में ही संचालित होगी, जिससे व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
इस बार सरकार ने किसानों को अतिरिक्त लाभ देने के लिए गेहूं की एमएसपी के साथ प्रति क्विंटल ₹40 का बोनस देने का निर्णय लिया है। इस बोनस के बाद किसानों को गेहूं का कुल भाव ₹2,625 प्रति क्विंटल प्राप्त होगा। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रशासन ने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। खरीद केंद्रों पर तौल, परिवहन और भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाने की दिशा में काम किया गया है।
इस बार की गेहूं खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होने की उम्मीद है। पंजीकरण में आई बढ़ोतरी और सरकार द्वारा दिए जा रहे बोनस ने किसानों की उम्मीदों को और मजबूत किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि खरीद प्रक्रिया कितनी सुचारू और सफल रहती है।
