शरीर को शीतलता मिलती है
आयुर्वेद के अनुसार पुदीना कफ और पित्त की मात्रा निर्धारित होती है। इसके सेवन से पेट की गर्मी कम होती है और शरीर में ठंडक का एहसास होता है। पुदीने में मौजूद मेन्थॉल मस्तिष्क तक संदेश भेजा जाता है कि शरीर में ठंडक आ रही है, जिससे सिरदर्द और बेचैनी गर्मी से जुड़ी लत कम होती है।
पाचन तंत्र के लिए बाध्य
गर्मियों में अक्सर तल-भुना और भारी भोजन खाने से पेट में गैस, भारीपन और खट्टी डकारें होती हैं। पुदीना पाचन तंत्र को शांत करता है, अम्लता को कम करता है और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) में राहत देता है। इसे आप चिप्स, रायते या ठंडे पानी में आसानी से ले सकते हैं।
लू से बचाव और ऊर्जा को बढ़ाता है
पुदीना लू से बचने में भी मदद करता है। यह ठंडा करने वाला असर शरीर को ताजगी देता है और गर्मी में होने वाली थकान को कम करता है। गर्मियों की धूप में पुदीने का सेवन शरीर को वर्गीकृत संग्रह में भी रखा जाता है।
बाहरी इस्तेमाल से भी लाभ
पुदीना केवल खाने के लिए ही नहीं, बल्कि इस्तेमाल पर भी जादुई है:
फेसबुक पर लेप: मुंहासे और टैनिंग कम करने में मदद करता है।
सिर दर्द में राहत: पुदीने की चाय या ताज़ा पत्ते का सेवन सिरदर्द और तनाव को कम करता है।
तनाव कम करना: पुदीने की चाय मन को शांत और ताजगी से भर देती है।
नारियल, रायता या कीक में पुदीने की बनी चीजें।
दिन में 1-2 बार पुदीने की चाय छोड़ें।
चेहरे पर ताजा पुदीने का लेप मुंहासे और तैलीय त्वचा के लिए करें।
गर्मियों में ठंडा पानी या नींबू पानी में पुदीने की धुलाई डालें।
