डिब्बाबंद और बाजार में मिलने वाले फ्रूट जूस को अक्सर लोग फलों का बेहतर विकल्प मान लेते हैं। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पैक्ड जूस में लंबे समय तक खराब न होने के लिए प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। वहीं ताजे जूस में से फाइबर निकाल दिया जाता है जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। बिना फाइबर के जूस शरीर में तेजी से शुगर बढ़ाता है और लीवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
इंस्टेंट ओट्स को लोग वजन घटाने का आसान तरीका मानते हैं लेकिन 2 मिनट में बनने वाले ओट्स असल में काफी प्रोसेस्ड होते हैं। इनमें सोडियम चीनी और कृत्रिम फ्लेवर मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। अगर आप ओट्स का सही फायदा चाहते हैं तो कम प्रोसेस्ड विकल्प चुनना ज्यादा बेहतर होता है।
ब्राउन ब्रेड को भी लोग हेल्दी समझकर खाते हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ नाम का ही हेल्दी होता है। बाजार में बिकने वाली कई ब्राउन ब्रेड में मैदा की मात्रा ज्यादा होती है और उसे भूरा दिखाने के लिए अलग से रंग मिलाया जाता है। यह पाचन को प्रभावित करने के साथ वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है।
फ्लेवर्ड दही और पैक्ड लस्सी भी हेल्दी के नाम पर बेचे जाने वाले ऐसे उत्पाद हैं जिनमें जरूरत से ज्यादा चीनी मिलाई जाती है। इनका स्वाद भले ही अच्छा लगे लेकिन ये शरीर को उतना फायदा नहीं देते जितना सादा दही देता है। साथ ही इनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
शुगर फ्री प्रोडक्ट्स भी एक बड़ा भ्रम हैं। लोग सोचते हैं कि इनमें चीनी नहीं होती इसलिए ये सुरक्षित हैं लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं जो लंबे समय में शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं। ज्यादा मात्रा में इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इसलिए जरूरी है कि हम केवल पैकेट पर लिखे दावों पर भरोसा न करें बल्कि उसके अंदर मौजूद सामग्री को भी समझें। जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें। याद रखें असली हेल्दी फूड वही है जो प्राकृतिक हो और जिसे ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसी केमिकल की जरूरत न पड़े।
