सबसे पहले दर्शन का सही समय चुनना महत्वपूर्ण है। राम नवमी के दिन मंदिर में कतारें कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं तो राम नवमी से 2 3 दिन पहले या उत्सव के 2 दिन बाद मंदिर जाने की योजना बनाएं। मुख्य उत्सव के दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में सबसे अधिक भीड़ रहती है क्योंकि इसी समय मध्याह्न की विशेष आरती और सूर्य तिलक होता है।
ठहरने और खाने पीने का भी सही प्लान बनाना जरूरी है। भीड़ के कारण अयोध्या के होटलों और धर्मशालाओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि मुख्य शहर में कमरे नहीं मिल रहे हैं तो फैजाबाद (अयोध्या कैंट) या गुप्तार घाट के पास ठहरने का विकल्प देखें। यहां से मंदिर तक ई रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था रहती है, और राम पथ के किनारे कई किफायती भोजनालय भी हैं।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। प्रशासन ने इस बार ई पास या क्यूआर कोड आधारित प्रवेश व्यवस्था पर जोर दिया है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा और चमड़े के सामान ले जाना वर्जित है। भारी भीड़ को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मुख्य उत्सव के दिन मंदिर ले जाने से बचें। राम जन्मभूमि पथ पर लंबी पैदल यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना न भूलें।
अयोध्या की यात्रा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रखें। यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और सरयू तट की आरती का भी आनंद लें। शाम के समय सरयू घाट पर होने वाला लेजर शो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
राम नवमी पर अयोध्या की यात्रा आस्था का अनूठा अनुभव है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना, समय पर बुकिंग करना और धैर्य रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ आप राम लला के दर्शन को आराम से और सफलतापूर्वक कर पाएंगे।
