कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम व्यवसायों को अधिक लचीला ढांचा प्रदान करता है। इस संशोधन के जरिए दोनों कानूनों को और अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी विधि समिति में उद्योग संगठनों, पेशेवर संस्थानों, कानूनी और लेखा विशेषज्ञों को शामिल किया गया था, जिनकी सिफारिशों के आधार पर विधेयक तैयार हुआ है। रिपोर्ट को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए भी जारी किया गया था, जिसके बाद प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखकर अंतिम मसौदा तैयार किया गया।
विपक्ष का विरोध, सीएसआर प्रावधानों पर उठे सवाल
हालांकि, विधेयक पेश किए जाने से पहले विपक्ष ने इसका विरोध किया। कांग्रेस सांसद Manish Tewari, टीएमसी के Saugata Roy और डीएमके की T. Sumathy ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर प्रावधानों को कमजोर कर सकता है। इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य नियमों को आसान बनाना और निवेश को आकर्षित करना है, न कि किसी प्रावधान को कमजोर करना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मजबूत होगा।
आईबीसी संशोधन की भी तैयारी, समाधान प्रक्रिया होगी तेज
सरकार कॉर्पोरेट क्षेत्र में सुधार के लिए अन्य कदम भी उठा रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे चालू सत्र में नया विधेयक पेश करने का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रस्ताव Insolvency and Bankruptcy Code में सुधार से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। यह संशोधन Baijayant Panda की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
