बताया जा रहा है कि तुलसी नाम से खाद्य तेल के ब्रांड को लेकर विवाद शुरू हुआ। पतंजलि फूड्स लिमिटेड का दावा है कि तुलसी उनका अधिकृत ब्रांड है और इस नाम का उपयोग किसी अन्य संस्था द्वारा करना नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके बाद कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश जारी किए।
इसी आदेश के तहत नरसिंहपुर के करेली क्षेत्र के जोहारिया में स्थित अनिल इंडस्ट्रीज पर पतंजलि की लीगल टीम ने पहुंचकर कार्रवाई की। आरोप है कि अनिल इंडस्ट्रीज तुलसी नाम से खाद्य तेल बेच रही थी जो कि ट्रेडमार्क नियमों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार किसी भी पंजीकृत ब्रांड नाम के साथ समान या भ्रम पैदा करने वाले शब्दों का उपयोग करना अवैध माना जाता है।
हालांकि इस मामले में अनिल इंडस्ट्रीज के मालिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने उत्पाद के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं जिनमें ट्रेडमार्क और कॉपीराइट से संबंधित औपचारिकताएं शामिल हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अपने ब्रांड का विज्ञापन भी प्रकाशित कराया था और उस समय किसी भी प्रकार की आपत्ति सामने नहीं आई थी।
इतना ही नहीं उन्होंने पतंजलि फूड्स लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार जब उन्होंने अपने उत्पादों को पतंजलि के माध्यम से बेचने से इनकार किया तो उनके खिलाफ इस तरह की कानूनी कार्रवाई की गई।
यह मामला अब पूरी तरह न्यायालय के अधीन है और अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावों पर कायम हैं जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तविक रूप से किसका पक्ष मजबूत है।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यापारिक दुनिया में ब्रांड और पहचान को लेकर प्रतिस्पर्धा किस हद तक जा सकती है। ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे कानूनी अधिकार जहां कंपनियों की पहचान की रक्षा करते हैं वहीं इनके दुरुपयोग के आरोप भी समय समय पर सामने आते रहते हैं। अब सभी की नजर न्यायालय के फैसले पर टिकी है जो यह तय करेगा कि इस विवाद में कौन सही है और कौन गलत।
