निर्यात में मजबूती, सालाना प्रदर्शन भी बेहतर
वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। यह पिछले वित्त वर्ष (825.26 अरब डॉलर) की तुलना में 4.22% की बढ़त दर्शाता है।
यह आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
आयात में गिरावट से घाटा कम
मार्च में आयात 5.98% घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया। आयात में कमी आने से व्यापार घाटा घटा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को राहत मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में कमी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की रणनीतिक खरीद में बदलाव रहा है।
तेल रणनीति ने दिलाई राहत
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय अपने भंडार का उपयोग किया। इससे तेल आयात बिल कम हुआ और व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ा।
वैश्विक तनाव के बीच आया डेटा
यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल-गैस का व्यापार होता है, वहां तनाव के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
भारत को मिली राहत: LPG सप्लाई जारी
तनाव के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया।
‘जग विक्रम’ नामक पोत 20,400 मीट्रिक टन LPG लेकर Kandla Port पहुंचा
‘ग्रीन आशा’ जहाज 15,400 टन LPG के साथ Jawaharlal Nehru Port पहुंचा
इससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।
क्या है इसका व्यापक असर?
निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा
आयात घटने से व्यापार घाटा नियंत्रित रहेगा
वैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता मजबूत दिखती है
