राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन साधने के लिहाज से इन नियुक्तियों को बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया है। संभावित सूची के अनुसार अनुसूचित जाति आयोग के लिए कैलाश जाटव का नाम सामने आ रहा है जबकि अनुसूचित जनजाति आयोग की जिम्मेदारी भगत सिंह नेताम को दी जा सकती है। वहीं युवा आयोग के लिए प्रवीण शर्मा का नाम चर्चा में है जो युवा वर्ग को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इसी तरह लघु उद्योग निगम के लिए विनोद गोटिया का नाम आगे चल रहा है हालांकि उनकी रुचि पर्यटन विकास निगम में बताई जा रही है। मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के लिए संजय नगाइच का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से कटनी विकास प्राधिकरण में शशांक श्रीवास्तव और ओरछा विकास प्राधिकरण में अखिलेश अयाची को जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा वित्त विकास निगम के लिए दीपक सक्सेना और कोल विकास प्राधिकरण के लिए रामलाल रौतेल के नाम पर भी सहमति बनने की बात कही जा रही है।
इन संभावित नियुक्तियों के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। भोपाल से जुड़े कई पूर्व मंत्रियों के नाम इस सूची में शामिल बताए जा रहे हैं जिनमें लालसिंह आर्य अरविंद भदौरिया रामनिवास रावत उमाशंकर गुप्ता कमल पटेल रामपाल सिंह और इमरती देवी जैसे अनुभवी चेहरे शामिल हैं। इसके साथ ही अंचल सोनकर संजय शुक्ला अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर को भी अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं विधायकों और पूर्व विधायकों को भी इस बार नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। अजय बिश्नोई शैलेंद्र जैन प्रदीप लारिया ध्रुव नारायण सिंह अभिलाष पांडे और आशीष शर्मा जैसे नाम भी चर्चा में हैं जिन्हें विभिन्न निगम मंडलों या प्राधिकरणों में जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी एक ओर जहां संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है वहीं दूसरी ओर असंतुष्ट नेताओं को साधने की रणनीति भी साफ नजर आ रही है। अब सभी की नजर आधिकारिक सूची पर टिकी है जो किसी भी वक्त जारी हो सकती है और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।
