कार्यभार संभालने के बाद प्रियंक मिश्रा ने अपने पहले बयान में ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने कहा कि भोपाल केवल मध्यप्रदेश की राजधानी ही नहीं बल्कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। ऐसे में राजधानी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है और इसी दृष्टिकोण के साथ वे काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश की अहम भूमिका है और उस लक्ष्य को हासिल करने में भोपाल की भागीदारी निर्णायक होगी।
प्रियंक मिश्रा ने अपने संबोधन में यह स्वीकार किया कि भोपाल में पहले भी अच्छा काम हुआ है और प्रशासन ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाए और जो काम पहले से हो रहे हैं उन्हें और अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही जहां सुधार की जरूरत है वहां नई रणनीति और नवाचार के जरिए बदलाव लाया जाएगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिए कि शहर के बुनियादी ढांचे, यातायात व्यवस्था, साफ सफाई और नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राजधानी होने के कारण भोपाल की छवि पूरे प्रदेश और देश के सामने एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत होती है इसलिए इसे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनाना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
नए कलेक्टर के इस विजन से प्रशासनिक अमले में भी नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों से समन्वय बनाकर काम करने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीमवर्क के जरिए ही बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी व्यवस्था पर भी उन्होंने जोर दिया।
भोपाल के नागरिकों के लिए भी यह एक उम्मीद भरा संदेश है कि शहर को नई दिशा देने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। अब देखना होगा कि प्रियंक मिश्रा अपने इस विजन को जमीन पर किस तरह उतारते हैं और भोपाल को वास्तव में देश की सबसे बेहतर राजधानी बनाने की दिशा में कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं।
