नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के दो दिवसीय श्रीलंका दौरे ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई कूटनीतिक दिशा देने का संकेत दिया है। कोलंबो पहुंचने पर उनका पारंपरिक कंडियन नृत्य के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाता है। इस दौरे के दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच साझा इतिहास, सभ्यता और लोगों के बीच गहरे संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर विचार साझा किए। बातचीत में विकास सहयोग, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय आधार पर भी अत्यंत मजबूत हैं और इन्हें और आगे ले जाने की आवश्यकता है।
द्विपक्षीय वार्ता में भारत की ओर से चल रही आवास परियोजना और श्रीलंका में हाल ही में आए तूफान से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण से जुड़े सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। लगभग 450 मिलियन की सहायता योजना के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके अलावा मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस विषय को मानवीय दृष्टिकोण से हल करने पर सहमति जताई ताकि सीमावर्ती समुद्री क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदायों की आजीविका सुरक्षित रह सके और किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो। इस बातचीत में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के किसी उपराष्ट्रपति का श्रीलंका का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा है। इस यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने भारतीय सहायता से निर्मित आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत बनाए गए घरों का भी उल्लेख किया, जिन्हें जल्द ही लाभार्थियों को सौंपा जाएगा। यह पहल दोनों देशों के बीच विकास सहयोग की गहराई और मानवीय जुड़ाव को दर्शाती है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत और श्रीलंका के संबंधों में केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी एक नई मजबूती का संकेत देता है। क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और मानवीय मुद्दों पर बढ़ती समझ भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा कर सकती है।
