इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लोकल QR कोड आधारित भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसका सीधा फायदा यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को मिलेगा, जो एक देश से दूसरे देश में जाते समय डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता दक्षिण कोरिया में वहां के QR कोड स्कैन कर अपने UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह दक्षिण कोरिया के नागरिक भारत में भी इसी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
यह पहल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत तकनीकी एकीकरण, सुरक्षा मानक, मुद्रा विनिमय और संचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह से उपलब्ध हो पाएगी।
भारत में UPI पहले से ही डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। देश के भीतर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अब इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसे वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और नकद रहित लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल भुगतान के अलावा इस समझौते के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की है। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं। दोनों देशों ने फिल्म, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को भी विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
इस डिजिटल पेमेंट एकीकरण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों का रास्ता खोल सकती है।
